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( कन्हैया ...देशद्रोह की पौध या राजनीतिक मोहरा )


कवि - मयंक शर्मा ( 9302222285 )

हाथ किसी के किसी का डंडा और किसी का झंडा है
जेएनयु का एक कन्हैया राजनीतिक हथकंडा है

आज अचानक जागा है तू कल तक तू क्यूँ सोया था
आज से पहले देश के हालातों पे क्यूँ ना रोया था

अगर गरीबों की चिंता है भेदभाव क्यूँ करता है
देढ़ साल पे साठ साल का दोष तू काहे मढ़ता है

क्या मोदी आने से पहले भारत मे खुशहाली थी
हर भूखे  हाथों मे क्या छप्पन भोगों की थाली थी

क्या मोदी आने से पहले कभी भी सूखा नही पड़ा
क्या मोदी आने से पहले कोई भूखा नही मरा

क्या मोदी से पहले जातिवाद नही था भारत मे
क्या मोदी से पहले कुछ बर्बाद नही था भारत मे

क्या मोदी से पहले कोई गम की वर्षा नही हुई
क्या मोदी से पहले कोई दलित की हत्या नही हुई

क्या मोदी से पहले पंद्रह लाख सभी का खाता था
सब के पास थी गाड़ी बंग्ला भारत खुशी मनाता था

सिक्खों की हत्या मे भी अफसोस जताना प्यारे तू
कैसी थी आपातकाल की रात बताना प्यारे तू

साठ साल का कच्चा चिठ्ठा बस मोदी मे थोप रहा
बन के किसकी कठपुतली मोदी पे खंजर घोंप रहा?

तुझे चाहिए आजादी भारत के टुकड़े करने की
तुझे चाहिए आजादी अफज़ल की करनी करने की

तुझे चाहिए आजादी पापी को प्यारा कहने की
संविधान को लात मार अपनी मर्जी से रहने की

असल मे ये सब नाटक है रे मनमर्जी करवाने का
देशद्रोह का गायक बनकर एक हीरो बन जाने का

बिका हुआ कुछ मीडिया तेरा परचम थामे बैठा है
राहुल , केजरीवाल भी तेरा दामन थामे बैठा है

बना के तुझको मोहरा अपनी नैय्या खेने निकले हैं
मोदी वाली हार का बदला देश से लेने निकले  हैं

कहता कवि 'मयंक' कन्हैया की बातों मे मत आना
चमगादड़ से मिलने तुम काली रातों मे मत आना.

कवि - मयंक शर्मा (09302222285)
         दुर्ग (छत्तीसगढ़)